कानपुर में सामने आए किडनी रैकेट मामले ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में डोनर आयुष की कहानी बेहद भावुक और चौंकाने वाली है, जिसने आर्थिक तंगी के चलते अपनी किडनी बेचने का फैसला लिया।

फीस भरने के लिए लिया बड़ा फैसला

आयुष ने खुलासा किया कि वह पढ़ाई की फीस भरने में असमर्थ था। इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए एक एजेंट ने उसे किडनी बेचने के लिए तैयार किया।

6 लाख में हुआ सौदा

आयुष के अनुसार, एजेंट ने उसे 6 लाख रुपये दिलाने का वादा किया था। तय हुआ कि आधी रकम पहले और बाकी ऑपरेशन के बाद दी जाएगी। आर्थिक संकट के चलते उसने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।

ऑपरेशन के बाद नहीं मिली पूरी रकम

आयुष ने बताया कि सर्जरी के बाद उसे तय रकम पूरी नहीं दी गई। इससे वह खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। इस घटना ने अवैध अंग तस्करी के नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे फंसते हैं लोग ऐसे जाल में

विशेषज्ञों के मुताबिक, आर्थिक तंगी और जागरूकता की कमी के कारण कई लोग ऐसे अवैध रैकेट का शिकार हो जाते हैं। एजेंट पहले बड़े पैसे का लालच देते हैं और बाद में शर्तें बदल देते हैं।

जांच में जुटी पुलिस

किडनी रैकेट का खुलासा होने के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है और आगे कार्रवाई की तैयारी है।

यह मामला न केवल कानून व्यवस्था बल्कि समाज में बढ़ती आर्थिक असमानता और मजबूरी की भी एक गंभीर तस्वीर पेश करता है।

लेखक

आरती तिवारी

झांसी और बुंदेलखंड की राजनीतिक और जमीनी रिपोर्टिंग।